Government is preparing to ban cryptocurrency trading in India

2018 में RBI ने डिजिटल मुद्राओं(Digital Currencies) में किसी भी व्यक्ति या व्यवसाय को सेवाएं प्रदान करने से एक्सचेंज को प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया ।

सरकार क्रिप्टोकररेंसी में ट्रेडिंग पर प्रतिबंध(Ban on Cryptocurrency Trading in India) लगाने के लिए एक कानून लाने की योजना बना रही है, सूत्रों की मानो तो बताया जा रहा है की , सरकार एक ऐसा कदम उठा सकती है उन उद्योग के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है जो लॉकडाउन के दौरान फलफूल रहे है। Government is preparing to ban cryptocurrency trading in India

Supreme Court ने मार्च 2020 में भारतीय रिज़र्व बैंक के उस Circular को अलग कर दिया जिस कानून के तहत भारतीय डायरेक्ट बैंक अकाउंट को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज से लिंक करके Digital Currencies खरीद नहीं कर सकते थे और क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित सेवाएं प्रदान करने से बैंक पर रोक लगा दी गयी थी। भारतीय और विदेशी क्रिप्टोकररेंसी मेजर आदेश का पालन करते हुए डिजिटल टेंडर सरकार या आरबीआई से स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है की “सरकार में विचार चल रहा था कि किसी भी कानून के माध्यम से इस पर प्रतिबंध(Ban) लगाना ज्यादा मुश्किल होगा। यह स्पष्ट रूप से बिज़नेस को गैरकानूनी रूप परिभाषित करेगा। खबरों के अनुसार अंतर-मंत्रालयी चर्चा के लिए संबंधित मंत्रालयों को एक नोट भेज दिया गया है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार कानून मंत्रालय, सूचना और टेक्नोलॉजी मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक कानून के ढांचे के साथ विचार कर रही है, जो कि भारत में क्रिप्टोकररेंसी में ट्रेडिंग(Ban on Cryptocurrency Trading in India) को औपचारिक रूप से समाप्त कर देगा।

सर्कार इस पर काम कर रही हैं। अंतर-मंत्रालयी के विचार के बाद, इसे (नोट) कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। एक बार संसद सत्र शुरू होने के बाद, हम इसकी पुष्टि होने की उम्मीद कर रहे हैं “सूत्रों के अनुसार”

2018 में क्रिप्टोकररेंसी

2018 में, RBI ने डिजिटल मुद्राओं जैसे की बिटकॉइन में किसी भी व्यक्ति या व्यवसाय(Business) को सेवाएं प्रदान करने से प्रतिबंधित लगा कर वंचित कर दिया था ।

आरबीआई(RBI) के Circular को दर्शाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नागरिकों को व्यापार के मौलिक अधिकार के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी और एक्सचेंजों में अपना नया उद्योग बनाने का भी अधिकार है।

सरकार ने 2017 में तत्कालीन वित्त सचिव सुभाष गर्ग(Finance Secretary Subhash Garg) के नेतृत्व में एक पैनल गठित किया था, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी के पारिस्थितिकी का अध्ययन किया गया जाता था।

अपनी रिपोर्ट में पैनल ने सभी प्रकार की निजी डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया था । हालांकि, इसने RBI और सरकार से आधिकारिक निजी डिजिटल करेंसी की संभावना को देखने के लिए भी कहा था ।

क्रिप्टोकरेंसी में लेन – देन करने वाले को 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और 10 साल तक की कैद का सुझाव दिया गया था।

आयकर विभाग(Income Tax Department) ने 500,000 निवेशकों को नोटिस जारी किए, जिनके द्वारा नए प्लेटफ़ॉर्म लाये गए थे और जो निजी मुद्राओं(Virtual Currencies) में ट्रेडिंग कर रहे थे।

नोटिस में पूछा गया था कि Cryptocurrency की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मुनाफे में वृद्धि पर टैक्स का भुगतान किया गया था।

यह भी पढ़े: नौकरी से ज्यादा कमाई इस बिजनेस में प्रति वर्ष 10 से 12 लाख बचाएं।

अप्रत्यक्ष कर विभाग(Indirect Tax Department) ने भी क्रिप्टो एक्सचेंजों को नोटिस जारी किया और इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या वे क्रिप्टोकरेंसी को माल या सेवाओं की आपूर्ति के रूप में मान रहे है और वह सर्विसेज टैक्स का भुगतान कर रहे है जा नहीं।

जैसा कि Lockdown में देखा जा सकता है की , क्रिप्टोकररेंसी में लाखों डॉलर का व्यापार हर हफ्ते किया जा रहा है, जिसमें लॉकडाउन इसकी वॉल्यूम कोओर ऊपर धकेल रहा है। सरकार, उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने कहा, एक नियामक तंत्र के साथ नहीं आने से कीमती राजस्व का नुकसान हो रहा था।

निवेशकों की बढ़ती संख्या ने क्रिप्टोकरेंसी(Cryptocurrency) में शरण ली है क्योंकि कोरोनोवायरस के प्रकोप से पारंपरिक संपत्ति ,अर्थव्यवस्था और सेहत को लेकर चिंता का विषय बन गया है।

 


DAILY INDIA NEWS के साथ जुड़े रहने के लिए हमारा FACEBOOK पेज को Follow जा Like करना ना भूले।